
महा कुंभ
rhythmic, hip-hop
RevolutionarySurfPunk9779·3:29

3:29
महा कुंभ
rhythmic, hip-hop
Creator: RevolutionarySurfPunk9779Release Date: January 28, 2025
Lyrics
[Verse]
सांझ का सूरज ढलता क्या है
गंगा का किनारा सजता क्या है
केसरिया परदा चमकता आसमान में
यत्र-तत्र साधु की धुन सुने हैं
[Verse 2]
शंख के स्वर से जागे हिलते सबके दिल
महा कुंभ का मेला लगे जैसे कोई स्वर्ग स्थिल
आस्ताओं का सैलाब मानो जैसे तूफान
हर हर महादेव की आवाज गूंजे यहाँ-वहाँ
[Chorus]
महा कुंभ का रंग है निराला
धार्मिक जोश में झूमे हर बाला
डुबकी लगाके सब पाप सिंधुवित्त
यहीं मिलता है मोक्ष का सही गुरुत्व
[Verse 3]
साधुओं की टोली यहाँ आती खूब
सबके दिलों में बस ये एक ही जुब
कुंभ के मेले में आकर देख
अद्भुत नज़ारे और इंसानी स्नेह
[Bridge]
दीपों की झिलमिल और गंगा की धारा
महा कुंभ का उजाला जगमगाता सारा
अजनबी मिलते हैं अपने बन जाते
इस दिव्य मेले में सब रंग छा जाते
[Verse 4]
भाग्य की रेखाएँ यहाँ पर मिलती
अधूरी मन्नतें भी यहाँ बनती
सुनो भाईयों और बहनों की बात
महा कुंभ का मेला जन्नत की रात
सांझ का सूरज ढलता क्या है
गंगा का किनारा सजता क्या है
केसरिया परदा चमकता आसमान में
यत्र-तत्र साधु की धुन सुने हैं
[Verse 2]
शंख के स्वर से जागे हिलते सबके दिल
महा कुंभ का मेला लगे जैसे कोई स्वर्ग स्थिल
आस्ताओं का सैलाब मानो जैसे तूफान
हर हर महादेव की आवाज गूंजे यहाँ-वहाँ
[Chorus]
महा कुंभ का रंग है निराला
धार्मिक जोश में झूमे हर बाला
डुबकी लगाके सब पाप सिंधुवित्त
यहीं मिलता है मोक्ष का सही गुरुत्व
[Verse 3]
साधुओं की टोली यहाँ आती खूब
सबके दिलों में बस ये एक ही जुब
कुंभ के मेले में आकर देख
अद्भुत नज़ारे और इंसानी स्नेह
[Bridge]
दीपों की झिलमिल और गंगा की धारा
महा कुंभ का उजाला जगमगाता सारा
अजनबी मिलते हैं अपने बन जाते
इस दिव्य मेले में सब रंग छा जाते
[Verse 4]
भाग्य की रेखाएँ यहाँ पर मिलती
अधूरी मन्नतें भी यहाँ बनती
सुनो भाईयों और बहनों की बात
महा कुंभ का मेला जन्नत की रात
