
महा कुंभ
rhythmic, hip-hop

महा कुंभ
rhythmic, hip-hop
Lyrics
Verse
सांझ का सूरज ढलता क्या है
गंगा का किनारा सजता क्या है
केसरिया परदा चमकता आसमान में
यत्र-तत्र साधु की धुन सुने हैं
Verse 2
शंख के स्वर से जागे हिलते सबके दिल
महा कुंभ का मेला लगे जैसे कोई स्वर्ग स्थिल
आस्ताओं का सैलाब मानो जैसे तूफान
हर हर महादेव की आवाज गूंजे यहाँ-वहाँ
Chorus
महा कुंभ का रंग है निराला
धार्मिक जोश में झूमे हर बाला
डुबकी लगाके सब पाप सिंधुवित्त
यहीं मिलता है मोक्ष का सही गुरुत्व
Verse 3
साधुओं की टोली यहाँ आती खूब
सबके दिलों में बस ये एक ही जुब
कुंभ के मेले में आकर देख
अद्भुत नज़ारे और इंसानी स्नेह
Bridge
दीपों की झिलमिल और गंगा की धारा
महा कुंभ का उजाला जगमगाता सारा
अजनबी मिलते हैं अपने बन जाते
इस दिव्य मेले में सब रंग छा जाते
Verse 4
भाग्य की रेखाएँ यहाँ पर मिलती
अधूरी मन्नतें भी यहाँ बनती
सुनो भाईयों और बहनों की बात
महा कुंभ का मेला जन्नत की रात
