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महा कुंभ

rhythmic, hip-hop

RevolutionarySurfPunk9779·3:29

Lyrics

Verse

सांझ का सूरज ढलता क्या है

गंगा का किनारा सजता क्या है

केसरिया परदा चमकता आसमान में

यत्र-तत्र साधु की धुन सुने हैं

Verse 2

शंख के स्वर से जागे हिलते सबके दिल

महा कुंभ का मेला लगे जैसे कोई स्वर्ग स्थिल

आस्ताओं का सैलाब मानो जैसे तूफान

हर हर महादेव की आवाज गूंजे यहाँ-वहाँ

Chorus

महा कुंभ का रंग है निराला

धार्मिक जोश में झूमे हर बाला

डुबकी लगाके सब पाप सिंधुवित्त

यहीं मिलता है मोक्ष का सही गुरुत्व

Verse 3

साधुओं की टोली यहाँ आती खूब

सबके दिलों में बस ये एक ही जुब

कुंभ के मेले में आकर देख

अद्भुत नज़ारे और इंसानी स्नेह

Bridge

दीपों की झिलमिल और गंगा की धारा

महा कुंभ का उजाला जगमगाता सारा

अजनबी मिलते हैं अपने बन जाते

इस दिव्य मेले में सब रंग छा जाते

Verse 4

भाग्य की रेखाएँ यहाँ पर मिलती

अधूरी मन्नतें भी यहाँ बनती

सुनो भाईयों और बहनों की बात

महा कुंभ का मेला जन्नत की रात

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