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पलकों का ठहराव

indie-pop track blending acoustic simplicity with deep, emotional storytelling

pubg_jonu2·2:49

Lyrics

हाँ आ… हाँ आ…
हाँ आ… हाँ आ…

देखो-देखो, कैसे बदलते चेहरे,
पास हैं फिर भी लगते फासले
मैं समझ ना सकी…

सुनो-सुनो, इन अधूरी बातों में,
रोज़ तुम्हें ही ढूँढती हूँ मैं
पर तुम मिलते नहीं…

मेरी हँसी के पीछे कभी
थोड़ा दर्द भी पढ़ लो ना
हाय… पलकों पे जो ठहरा है
उसे गिरने से रोक लो ना…

अब ऐसे ना जाओ कि
साँसें लौट ना पाएँ वापस
तेरे जाने से बिखर जाऊँ मैं…

माना, दुनिया बड़ी सयानी
दिल की बातें कहाँ मानी
पर तेरे लिए रुकी रही…

देखो-देखो, थक कर इस दुनिया से
आते हो मेरे हिस्से में
फिर ठहरते क्यों नहीं…?

और पूछो ना कभी
कैसे कटती हैं मेरी शामें
बस इतना सुन लोगे
तो शायद मैं संभल जाऊँ…

हाँ, एक दिन शायद तुमको
मेरी कमी महसूस होगी
जब हर चेहरे में तुमको
थोड़ी मेरी झलक मिलेगी…

मेरी इन आँखों में देखो
कितना कुछ छुपा हुआ
जो लफ़्ज़ों में ना आया
वो सब दिल में दबा हुआ…

मेरी इन आँखों में देखो
इश्क़ अधूरा सोया है
तुम पास होकर भी जैसे
किस्मत से खोया है… 🎶

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