धुंधली सुबह का ख्वाब #Лингворитм лирика @rimok1982

Lyrics
घास पर सुबह-सुबह बर्फ सी छाई,
नीले आसमान में बादल जमे-जमे।
पेड़ों से पत्तियां गिरती धीरे-धीरे,
काम पर जाऊं, थका-थका सा मैं।
pre-chorus, male voice
धीरे-धीरे खो गया आधी नींद में,
मेरी कल्पना नाचती उसमें मगन।
पतझड़ के पत्तों से रंग के बाल,
मुझे पूरी तरह से ढक लेते वो।
महसूस हुई वसंत की हल्की हवा,
खुले नाच थे कितने प्यारे, मनभावन।
गर्मजोशी भरी बाहों में लिपट जाना,
शारीरिक इच्छाएं थीं कितनी पावन।
अचानक सारे रंग फीके पड़ गए,
उस घटना से मैं हिल गई थी पूरी।
आगे शायद कोई अनहोनी हुई थी,
कह ना पाई तुम्हें, उस वक़्त कभी।
फिर अचानक सुनाई दी बस की हॉर्न,
नसों में दौड़ गया बिजली का झटका।
दुख से देखता हूं सामने का शीशा,
ख्वाब में तो हम कितने खुश थे!
महसूस हुई वसंत की हल्की हवा,
खुले नाच थे कितने प्यारे, मनभावन।
गर्मजोशी भरी बाहों में लिपट जाना,
शारीरिक इच्छाएं थीं कितनी पावन।
धीरे-धीरे खो गया आधी नींद में,
मेरी कल्पना नाचती उसमें मगन।
पतझड़ के पत्तों से रंग के बाल,
मुझे पूरी तरह से ढक लेते वो।
पेड़ों से पत्तियां गिरती धीरे-धीरे,
काम पर जाऊं, थका-थका सा मैं।
