
खुशी की ट्रेन 17.2
guitar.synthetic female.futuristic groovy electronic.

खुशी की ट्रेन 17.2
guitar.synthetic female.futuristic groovy electronic.
Lyrics
(पहला पद)
आज सुबह मैं उठा, आसमान में सूरज चमक रहा था। मैं एक नवजात शिशु जैसा महसूस कर रहा हूँ, मैं समझा नहीं सकता क्यों। लेकिन एक फुसफुसाहट, एक शांत प्रतिध्वनि। यह मुझे अभी से बुला रही है, खुशी की ट्रेन पर।
(ताज़ा)
ओह, खुशी की ट्रेन आ रही है। यह हमें हर खोए हुए गाँव में जला देगी। यह सारा दुख और दर्द वापस ले आएगी। सब सवार हो जाओ, सब सवार हो जाओ खुशी की ट्रेन पर।
(पहला पद)
मैं हवा में मुस्कुराते हुए चेहरे और हँसी देख रहा हूँ। चिंता का कोई समय नहीं, निराशा का कोई समय नहीं। लय बढ़ रही है, और मुझे एक सुखद ताज़गी महसूस हो रही है। हम खुशी की ट्रेन के करीब पहुँच रहे हैं।
(ताज़ा)
ओह, खुशी की ट्रेन आ रही है। यह हमें हर खोए हुए गाँव में जला देगी। यह सारा दुख और दर्द वापस ले आएगी। सब, सब, खुशी की ट्रेन पर।
(परिवर्तन)
दुनिया घूमती रहती है, तेज़ और मुक्त। लेकिन इस यात्रा में, सिर्फ़ तुम और मैं हैं। कोई अंतिम मंज़िल नहीं है, रास्ते में बस खुशियाँ ही खुशियाँ हैं।
हर दिन इसी मनःस्थिति में यात्रा करें।
(अपडेट)
आह, खुशियों की रेलगाड़ी आ रही है।
हमें हर खोए हुए गाँव में जला रही है।
सारे दुःख और दर्द पीछे छोड़ रही है।
सब सवार हो जाओ, सब सवार हो जाओ खुशियों की रेलगाड़ी में।
(आउटरो)
एक तेज़ दौड़ते चमत्कार की आवाज़ सुनो, एक मधुर, आनंदमय ध्वनि।
खुशियों की रेलगाड़ी, वह आज़ादी जो हमें मिली है।
धूप और बारिश को चीरते हुए, अंतहीन यात्रा करें।
सब सवार हो जाओ, सब सवार हो जाओ खुशियों की रेलगाड़ी में।
सब सवार हो जाओ, सब सवार हो जाओ खुशियों की रेलगाड़ी में।
