समर्पण - Devotion

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समर्पण - Devotion

Lyrics

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《 समर्पण 》

2025 © Gennady Ravensky

"Devotion"

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Intro

Instrumental Interlude

Verse 1

मैं हूँ तुम्हारा हृदय,

तुम्हारी ही रचना,

मेरे जीवन की सारी बातें,

पल भर में बदलती हो।

Riff

( cieeh, cieeh... )

Verse 2

जब तुम नज़रें उठाती हो,

मुझसे बात करती हो,

इस जग में मेरा होना,

बस तेरी ही कल्पना।

Chorus

[spoken] सब मिलकर बोलिए!

Audience Sing Along

( मैं ही तेरा दिल हूँ, )

( तेरी ही रचना हूँ। )

[spoken] ज़ोर से बोलिए!

Audience Sing Along

( तुम नज़रें उठाती हो, )

( मुझसे बातें करती हो। )

[spoken] एक बार और!

Audience Sing Along

(अगर तुम मेरी सुनोगी, )

(तो मैं तुम्हारे लिए जान दे दूँगा। )

Verse 3

जब तक तुम मेरी हो,

मैं पास ही रहूँगा,

क्योंकि मेरे हर श्वास में,

तेरा ही राज़ समाता है।

Riff

( cieeh, cieeh... )

Verse 4

यह जीवन अब सिर्फ़,

तुम्हारा ही कहलाता है,

अगर तुम पुकारोगी,

तो प्राण भी दे दूँगा।

Chorus

[spoken] सब मिलकर बोलिए!

Audience Sing Along

( मैं ही तेरा दिल हूँ, )

( तेरी ही रचना हूँ। )

[spoken] ज़ोर से बोलिए!

Audience Sing Along

( तुम नज़रें उठाती हो, )

( मुझसे बातें करती हो। )

[spoken] एक बार और!

Audience Sing Along

(अगर तुम मेरी सुनोगी, )

(तो मैं तुम्हारे लिए जान दे दूँगा। )

Outro

[spoken] सब मिलकर बोलिए।

Audience Sing Along

(अगर तुम मेरी सुनोगी, )

(तो मैं तुम्हारे लिए जान दे दूँगा। )

[spoken] एक बार और!

Audience Sing Along

(अगर तुम मेरी सुनोगी, )

(तो मैं तुम्हारे लिए जान दे दूँगा। )