
पिता - आसमान, माता - ज़मीन
ethno-jazz, afro-cuban jazz

पिता - आसमान, माता - ज़मीन
ethno-jazz, afro-cuban jazz
Lyrics
एक सुबह या दोपहर
रुस्सी लोग बहस करने लगे:
कौन है ज्यादा ताकतवर, किसकी जाति रोशन,
आसमान की या धरती की शरण।
अर पुराना योद्धा खड़ा होया
सारी भीड़ के उपर
और जल्दी ही कहलया
युद्ध के बारे में, जहां दुश्मन बेहरूपिया।
सुबह का समय था, मैदानी इलाके में बहुत जगह थी। आसमान में बादल तैर रहे थे।
दुश्मन हमें सींग की आवाज़ के साथ मार रहा था, कोई हुक्म नहीं था दुश्मन पर।
और, अंतिम ताकत इकट्ठा करके, सेनापति ने फुसफुसाया!
मदद करा, बाप स्वारोग, हमारी मदद कर, और तू भी, धरती!
उसी पल अचानक गरज उठ्या,
आसमानों में झन-झन हुई।
पैरों तले चिरचिराहट करी,
मां-धरती कांप उठी।
दुश्मन घायल-टुटा, मौत का छत्र छाया,
आसमान में फौज सदा के लिए छिपी, मर गए सोने का रास्ता दिया!
लड़ाई हम जल्दी जीत गए, बलिदान बड़े थे।
दुश्मन भागा, बीमार छोड़के, हमारी मातृभूमि से।
ताकि बहस करना बंद करो, बेथक में झगड़ने की कोई ज़रूरत न है।
आसमान हमें अपने में छुपाएगा, और माँ-धरती मदद करेगी।
ताकि बहस करना बंद करो, बेथक में झगड़ने की कोई ज़रूरत न है।
आसमान हमें अपने में छुपाएगा, और माँ-धरती मदद करेगी।
