ध्रुव

Lyrics
(Verse 1)
कोहरे का पर्दा, अँधेरे का साया
चारों ओर थी उलझन की एक माया
एक बालक ने टकटकी लगाई
अटल रहने की कसम उसने खाई
कहा उसने, "मैं रुकूंगा नहीं,
जब तक मिलेगा, तब तक ठहरूंगा नहीं।"
(Pre-Chorus)
उसकी प्रतिज्ञा थी लोहे सी पक्की
ध्यान की गहराई, इच्छाशक्ति चक्की
शब्दों से बुनी एक अटल राह
वह बन गया वो, जो समय को राह।
(Chorus)
ओ ध्रुव! तू टिका रहा अडिग, अटल
आकाश का वो एकमात्र स्थिर नक्षत्र
तारों के बीच तू करें प्रभु की आरती
संकल्प की ज्योति, तू सदियों का साथी
तू हर रात रचता है इतिहास
लक्ष्य पर डटे रहो, करो विश्वास।
(Verse 2)
चुपचाप बैठा, सांसों की गिनती में
खोया हुआ था अपनी ही धुन की लय में
देह ने कहा "थक गए हो, छोड़ दो"
मन ने कहा "डगमगाओ, मोड़ लो"
पर उसकी आत्मा ने दोहराया एक स्वर
"मैं पाऊंगा, मैं पाऊंगा, मैं पाऊंगा अब नहीं डर।"
(Pre-Chorus)
उसके कर्मों ने गढ़ी एक कहानी
एकाग्रता की, तपस्या की वाणी
हर सांस बनी मंत्र, हर पल बनी साधना
वह बन गया वो, जो रहता है सदा।
(Chorus)
ओ ध्रुव! तू टिका रहा अडिग, अटल
आकाश का वो एकमात्र स्थिर नक्षत्र
तारों के बीच तू करें प्रभु की आरती
संकल्प की ज्योति, तू सदियों का साथी
तू हर रात रचता है इतिहास
लक्ष्य पर डटे रहो, करो विश्वास।
(Bridge)
जब भटकता है कोई, जब रात घनी है
जब दिशाहीन सा लगे ये जगत है
एक टिमटिमाता प्रकाश, न बोले कोई बात
कर देता है पुकार, पथिक की हर रात
वो कहता है, "देखो मुझे, मैं भी तो अकेला था
मेरी जिद ने ही तो, ये आकाश मुझे दिया था।"
(Chorus)
ओ ध्रुव! तू टिका रहा अडिग, अटल
आकाश का वो एकमात्र स्थिर नक्षत्र
तारों के बीच तू करें प्रभु की आरती
संकल्प की ज्योति, तू सदियों का साथी
तू हर रात रचता है इतिहास
लक्ष्य पर डटे रहो, करो विश्वास।
(Outro)
तू केवल तारा नहीं, एक सन्देश है
एक प्रतिबद्धता, एक अभिव्यक्ति है
ध्रुव... ध्रुव... ध्रुव...
तू सिखाता है डटे रहना...
बस ध्यान में अड़े रहना...
हरि ॐ...हरि ॐ...हरि ॐ...
